कुंडलपुर में लाखों जनसमूह के बीच हुआ अचार्य पद पर पदारोहण अनुष्ठान
संघ संचालक मोहन भागवत एवं मुख्यमंत्री मोहन यादव हुए शामिल
कुंडलपुर । सुप्रसिद्ध सिद्ध क्षेत्र ,जैन तीर्थ कुंडलपुर में युग श्रेष्ठ संत शिरोमणि आचार्य भगवन श्री विद्यासागर जी महाराज की समता पूर्वक समाधि होने के पश्चात रिक्त सिंहासन पर आचार्य पद पदारोहण हेतु अनुष्ठान महोत्सव में लाखों लोगों की उपस्थिति रही। इस भव्य और दिव्य कार्यक्रम में देश-विदेश से जुटे श्रद्धालु भक्तों के बीच आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के प्रथम शिष्य ज्येष्ठ श्रेष्ठ निर्यापक श्रमण मुनि श्री समय सागर जी महाराज को आचार्य पद पर प्रतिष्ठित कर आचार्य सिंहासन पर विराजमान किया गया। विराजमान करने के पूर्व संघ संचालक डॉ मोहन भागवत ,मंत्री प्रहलाद पटेल अशोक पाटनी द्वारा सिंहासन का लोकार्पण किया गया ।वहीं डॉक्टर मोहन भागवत ,मंत्री प्रहलाद पटेल, नवीन जैन सांसद के साथ सभी श्रावक श्रेष्ठि ,जैन तीर्थ क्षेत्र कमेटी के अध्यक्ष एवं उपस्थित भारी जनसमूह ने आचार्य पद पर विराजमान होने के लिए मुनि श्री से निवेदन किया।ंं संपूर्ण मुनि संघ मुनि श्री समय सागर जी को लेकर आया और सिंहासन पर विराजमान कराया। शंखनाद हुआ और शास्त्रोक्त विधि पूर्वक मंत्रो के साथ कलश स्थापना हुई ।आचार्य श्री की महान कृति धीरोदय काव्य संग्रह सहित अन्य पत्रिकाओं का विमोचन डॉक्टर मोहन भागवत ने किया । मीडिया प्रभारी जयकुमार जैन जलज ने बताया इस अवसर पर मंगलाचरण की प्रस्तुति सुषमा दीदी ने की।ध्वजारोहण कंवर लाल सुरेश अशोक विमल पाटनी किशनगढ़ द्वारा किया गया। आचार्य श्री विद्यासागर मंडपम पंडाल का उद्घाटन प्रदीप नवीन चक्रेश जैन पीएनसी परिवार द्वारा किया गया ।अतिथियों द्वारा कुंडलपुर के बड़े बाबा ,आचार्य श्री ज्ञान सागर जी महाराज, आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के चित्र का अनावरण किया एवं दीप प्रज्वलित किया।इस अवसर पर मुख्य अतिथि डॉक्टर मोहन भागवत ने अतिथि उद्बोधन में कहा यहां उमड़ पड़ा जनसमूह सबको प्रणाम। मैंने आचार्य श्री विद्यासागर जी के दर्शन पहली बार जबलपुर दयोदय में किए ।आध्यात्मिक का परिचय तो था नहीं भय था कैसे मिलेंगे ।अपने देश की विशेष संस्कृति है वही जान सकता है जो आध्यात्मिक का साधक हो आचार्य श्री आध्यात्मिक साधक थे । स्वयं के बल पर थे संपूर्ण भारत को एकाकार किया हम एक कैसे हैं इसे जानने स्व को जानना चाहिए ।आचार्य श्री कहते थे भारत को भारत कहो इंडिया नहीं कहे ।अभी डोंगरगढ़ में आखिरी बार आचार्य श्री से मिला। उन्होंने पते की बात कही की जंगलों में बसने वाले बहुत अच्छे कारीगर हैं इस दिशा में कार्य होने चाहिए।वे अजातशत्रु थे ईश्वर की मंडली हमको मिलती रहे विद्यासागर जी उसे मंडली के थे ।आंखों के सामने वैसा ही आचार्य चाहिए आप सबने पूज्य मुनिश्री समय सागर जी को चुना है। उनके प्रति प्रणाम अर्पण करता हूं ।कार्यक्रम का संचालन मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज ने किया। इस अवसर पर निर्यापक मुनि श्री योग सागर जी महाराज ,निर्यापक मुनि श्री सुधा सागर जी महाराज, मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज, निर्यापक मुनि श्री अभय सागर जी महाराज, निर्यापक मुनि श्री संभव सागर जी महाराज ने मंगल प्रवचन दिए ।इस अवसर पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री मोहन यादव जी ने अपने उद्बोधन में कहा आचार्य समय सागर जी महाराज का यह पदारोहण महोत्सव में परमात्मा ने ये क्षण देकर जीवन को धन्य कर दिया। मैं बहुत सौभाग्यशाली हूं आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज का आशीर्वाद नेमावर में मिला था। वह देवत्व को धारण कर गए । मैंने खुले में मांस मछली का विक्रय प्रतिबंधित किया है उसका शक्ति से पालन भी मैंने कराया है। सागर में आयुर्वेदिक कॉलेज का नाम आचार्य श्री विद्यासागर के नाम पर किया गया है। उन्होंने कहा भावी पीढ़ी को उस लायक बनाया जाए जिससे भारतीय संस्कृति गौरवान्वित हो सके। आचार्य श्री समय सागर जी महाराज का आशीर्वाद सदैव मिलता रहेगा सरकार को एवं प्रदेशवासियों को। इस अवसर पर नव आचार्य श्री समय सागर जी महाराज ने अपनी प्रथम देशना दी। अभिनव आचार्य श्री का पाद प्रक्षालन अशोक पाटनी परिवार द्वारा किया गया। शास्त्र भेंट किए गए।
सबसे बड़े जैन मुनिसंघ को 59 दिनों के लम्बे इंतजार के बाद मंगलवार को सबसे बड़े गुरूजी के रूप मे निर्यापक श्रमण मुनि श्री समय सागर जी महाराज मिल गए। यह पद आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज की समाधि होने के बाद से खाली था। प्रसिद्ध जैन तीर्थ कुण्डलपुर मे आयोजित भव्यतम समारोह मे सैकड़ो मुनियो, आर्यकाओ और सामाजिक प्रतिनिधियों की अनुमोदना के साथ निर्यापक मुनि श्री समय सागर जी महाराज ने आचार्य पद का दायित्व संभाला। वर्तमान दौर के सबसे बड़े बदलावकारी घटना के देशभर के हजारों श्रावक श्रविकाए साक्षी बने।
उल्लेखनीय है कि संत, कवि, चिंतक के रूप देश दुनिया मे विख्यात जैनाचार्य विद्यासागर जी महाराज की गत 17 फ़रवरी की रात्रि को सल्लेखना पूर्वक समाधि हो गई थी। वह जनवरी 23 मे महाराष्ट्र के अंतरिक्ष पार्श्व नाथ सिरपुर मे चातुर्मास के बाद छत्तीसगढ़ के चन्द्रगिरी तीर्थ पहुंचे थे। दिसंबर महीने मे तिल्दा नेवरा मे पंच कल्याणक मे शिरकत करने के बाद वापस चंदगिरी पहुँचे थे। इस बीच उनके स्वास्थ्य मे गिरावट देखा जा रहा था पर कभी किसी ने सपने मे भी नहीं सोचा था आचार्य श्री का यह पड़ाव अंतिम साबित होने वाला है। स्वास्थ्य मे लगातार गिरावट के बाद आचार्य श्री ने अन्न, जल के अलावा आचार्य पद का त्याग कर दिया था। गत 17 फ़रवरी की मध्यरात्रि के बाद आचार्य श्री ब्रम्हालीन हो गए थे। उन्होंने समाधि के पूर्व अपने पहले शिष्य निर्यापक मुनि श्री समय सागर महाराज का आचार्य पद का दायित्व सौपने की मंशा जाहिर किया था।
अब बड़े गुरूजी
कर्नाटक के सदलगा निवासी मलप्पा जी और श्रीमंती के घर 27 अक्टूबर 58 को जन्मे शान्तिनाथ जो अब मुनि श्री समय सागर महाराज है ने हाइस्कूल तक मराठी मे लौकिक शिक्षा हासिल करने के बाद अतिशय क्षेत्र महावीर जी मे 2 मई 75 को ब्रम्हचर्य व्रत ले लिया था। उन्होंने 18 दिसंबर 75 को सिद्ध क्षेत्र सोनागिरी मे छुलक, 31 अक्टूबर 78 को सिद्धक्षेत्र नैनागिरी मे एलक और 8 मार्च 80 को सिद्धक्षेत्र द्रोणगिरी मे मुनि दीक्षा अंगीकार किया था। वह आचार्यश्री के पहले शिष्य है। जैनाचार्य विद्यासागर जी महाराज और नव आचार्य समय सागर जी महाराज के जन्म के साथ ऐसा विचित्र संयोग जुडा है। आचार्य श्री का जन्म 10 अक्टूबर 1946 को हुआ था उस दिन शरद पूर्णिमा थी। वही मुनि श्री समय सागर जी की जन्मतिथी 27 अक्टूबर 1958 है इस दिन भी शरद पूर्णिमा थी।
इतिहास ने बदला करवट
सदलगा के संत विद्यासागर महाराज ने 1972 मे आचार्य पद ग्रहण किया था। उन्हें यह दायित्व उनके गुरु आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज ने सौंपा था। बीते 52 सालों मे उन्होंने अपने त्याग, तपस्या और संयमित जीवन से दुनिया को दिगंबर तीर्थकरो के जीवंत स्वरूप का दर्शन कराया। उन्होंने मानव को जिन वाणी का रहस्य बताकर आत्म कल्याण का रास्ता दिखाया वही मूक प्राणियों की रक्षा के लिए कदम उठाकर और वर्तमान के वर्धमान कहलाए।
संतो का अदभुत समागम
आगामी 16 अप्रैल को हुए आचार्य पड़ारोहण समारोह मे शिरकत करने विभिन्न राज्यों मे विराजमान मुनिसंघ लम्बा पद विहार करते हुए कुण्डलपुर पहुंछा था। जानकारी के अनुसार मुनि विरसागर पुणे, सुधासागर आगरा, मुनि श्री प्रमाण सागर जी महराज शिखर जी से पदयात्रा कर सिद्ध क्षेत्र कुण्डलपुर पंहुचे थे। इस समारोह मे विद्यासागर जी महाराज के संघ के 9 निर्यापक मुनि, 78 मुनिराज, 152 आर्ययिकाए, 6 एलक, 41 छुलक सहित देशभर के अनुयायी शामिल हुए। यह दूसरा मौका था ज़ब समुचे संघ के दर्शन श्रवको को एक साथ दर्शन करने का मौका मिला. इससे पहले पंचायत कल्याणक महोत्स्व के दौरान सारे मुनि कुण्डलपुर मे जमा हुए थे।
छोटे को पहले बड़े को बाद मे दीक्षा
गृहस्थ जीवन के लिहाज से देखा जाए तो सदलगा के श्री मलप्पा और श्रीमंती के छठी संतान शान्तिनाथ जो वर्तमान मे मुनि श्री समय सागर महाराज ने मुनि दीक्षा 8 मार्च 1980 को ग्रहण किया था। वह आचार्य श्री के पहले शिष्य है। वही आचार्य श्री के गृहस्थ जीवन के बड़े भाई महावीर जी ने महाराष्ट्र के सिरपुर मे दीक्षा ग्रहण किया था। अब वह उत्कृष्ट सागर के रूप मे धरम प्रभावना बड़ा रहे है।
🙏 वरिष्ठ पत्रकार राजेश जैन रागी/रत्नेश जैन बकस्वाहा